सोमवार, 30 सितंबर 2013

बहस जारी है....

बहस जारी है....
देश के सबसे प्राइम चैनल के प्राइम टाइम पर हाल के सबसे प्राइम मुददे पर एक प्राइम बहस छिड़ी हुई थी। न्यूज एंकर रिपोर्टर कम फैशन जगत की पोस्टर ज्यादा लग रही थी, बहस में शामिल एक पुलिस अधिकारी से पूछती है-‘ इन दिनों जो रेप की घटनाएं बढ़ रहीं हैं उनमें पुलिस कितनी जिम्मेदार है?‘  पुलिस अधिकारी जिन पर फर्जी मुठभेड़ के कई मामले चल रहे थे, सीने को और चैड़ा करते हुए बोले-‘देखिए पुलिस अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाती है, अभी तक़़़ हम पर लोग रिश्वत देने के लिए उंगलियां उठाते थे कम से कम लोग यह तो जान गए हैं कि पुलिस रिश्वत देती भी है।‘ बहस के बैकग्राउंड में खबर चल रही थी ‘पांच साल की बच्ची के साथ बलात्कार‘।
‘तो मैडम आप का संगठन क्या कर रहा है?‘ सरकार के पैसों से हजारों-लांखों का फंड लेने वाले एन.जी.ओ की संचालिका जिनके आश्रम पर यौन शोषण का आरोप लगा था। अपना दामन संभाल कर बोली-‘ हमारे आश्रम में निराश्रित लड़कियां बिलकुल महफूज हैं। उन्हें आत्मरक्षा की टेनिंग भी दी जा रही है।‘ तभी एक विज्ञापन आता है जिसमें हाट ब्रांड्स के डियोडेन्ट्स लगाते ही लड़कियां चुंबक की तरह चिपकने लगती हैं। दस-पांच मिनट तक इसी प्रकार नारी सशक्तिकरण के बाद एंकर अगली बहस विपक्षी पार्टी के उन नेता जी से शुरू करती है जिनकी पार्टी में इस बार कम से कम आधा दर्जन बलात्कार के आरोपी संसद की शोभा बढ़ा रहे है।
 एकदम झक सफेद, दाग रहित कुर्ता पहने नेता जी आक्रोश की भंगिमा बनाकर कर बोले-‘हम तो कब से कह रहे है कि यह सरकार रेप के मामलां से निपटने में नाकाम रही है। हमारे कार्यकर्ता इस मुद्दे पर सरकार का संसद से सड़क तक विरोध कर रहे हे।‘ इस बार के ब्रेक में फिल्मों के प्रोमों आ रहे थे जो शीला की जवानी से शुरू होकर मुन्नी की बदनामी, चमेली की चिकनाहट और मिसकाॅल से लौंडिया के पटाने पर समाप्त हुए।
 सत्ताधारी पार्टी के नेता अपने तरकश से तीर निकालते हुए बोले-‘यह सब जनता के सामने हमारी इमेज खराब करने की विपक्षी साजिश है।‘ लेकिन आंकड़े तो यही बताते हैं कि रेप केस में दिनो दिन बढ़ोत्तरी हो रही है।.‘जी देखिए अपना प्रश्न फिर से दोहराएं मुझे कुछ सुनायी नहीं दे रहा है।‘ मैं यह कह रही थी...‘देखिए मुझे अब भी कुछ सुनायी नहीं दे रहा है।‘..‘लगता है कोई तकनीकी खराबी आ गयी हैं।‘ तभी ब्रेकिंग न्यूज आने लगी ..’’एक और गैंग रेप ..देश फिर शर्मशार‘’।
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-अलंकार रस्तोगी  

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