वह
बाबा जो भगवान् का पर्यायवाची तो छोडिये उन्ही की गद्दी को हिलाए पड़े हैं..वह बाबा
जो अपना साम्राज्य को किसी चक्रवर्ती सम्राट की तरह बढ़ाये चले जा रहें हैं..वह
बाबा जो अपने तंत्र को प्रजातंत्र से ऊपर मानने लगें हैं..वह बाबा जो नेताओं के
लिए अपरिहार्य हो चुके हों..वह बाबा जो साधक साधिकाओं के लिए परम आदरणीय, अहम्
अनुकरणीय हों. आज वही बाबा इस बाबा परायण देश में आपदाग्रस्त की श्रेणी में आ गए
हैं ।खैर आपदा तो वाकई आ ही गयी है । कारण
जो भी रहा हो । भले ही वह किसी दुराचार के मामले में आरोपित हों । भले वह अवैध
धंधों में लिप्त हों । भले वह भू- माफियों के भी बाप हों । भले ही वह लड़कियों का
शोषण कर रहे हों । भले ही बाबागिरी की आड़ में न जाने क्या क्या ताड़ रहें हों । भले
ही वह अपनी उम्र, गरिमा, सामाजिक मान्यता के परे गतिविधियाँ कर रहे हों । आज आपदाओं के
भंवर में खुद घिर गए हैं. ।
हर वह प्राणी जो बाबागिरी
के मूल तत्वों से युक्त है, वह इस बाबा जगत के आकाश
में धूमकेतु की तरह चमकने की फिराक में लगा हुआ है । खैर हर धूमकेतु की भी अपनी एक उम्र होती है और लगता है
कि आज इन्ही धूमकेतुओं पर ग्रहण लग गया है । बाबा तो बाबा उनके इस पुनीत कार्य में उनके पूरे परिवार का
भी अपार
सह्योग रहा है। वैसे परिवार जैसी संस्था का उद्देश्य भी यही होता है। यह
दूसरी बात है की यहाँ सहयोग नकारात्मक हो
रहा था ।
इस समय बाबा ब्लैक शीप की
तरह आचरण पर उतर आयें हैं। नये नए कारनामे उजागर हो रहें हैं । जो बाबा दुनिया को
माया मोह से विरत रहने की जुगत बताते हैं,वही इसमें लिप्त पाए जा रहें हैं। जो
बाबा लाखों करोडो की जनता के सामने तरह तरह की लीलाएं करते घूम रहे थे,
आज वही बाबा अपनी ब्लैक शीप वाली हरकतों
के कारण इसी जनता से भागे भागे फिर रहे हैं । इन बाबाओं की शक्ति आज लोंगो की
भक्ति को धता बता कर चिढाती फिर रही है। आज बाबा ब्लैक शीप पलायन कर गए हैं । वह
अपने कुकृत्यों से इतने भयभीत हैं कि उन्हें पूरी दुनिया का सामना करने का साहस
लुप्त हो गया है । चलो इस प्रजातान्त्रिक विवशता वाले देश में कम से कम इन बाबाओं
के पलायन के बाद जनता कुछ राहत की सांस तो
ले सकेगी ।
अलंकार
रस्तोगी
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