शर्मा जी पिछले बीस मिनट से टी0वी0 के बीस कामर्शियल बे्रक्स के इमोशनल अत्याचार को झेलते हुए ढाढस बांधे दाती महाराज के श्रीमुख से अपने भाग्य फल जानने की कोशिश में लगे हुए हैं। जनाब इन ज्योतिषाचार्यों के इतने बड़े फैन हैं कि अपने पूरे दिन का प्लान, इनके दिये हुए ज्ञान के आधार पर ही फिक्स करते हैं। यूं समझ लीजिए हमारे शर्मा जी का सारा साफ्टवेयर इन्हीं ज्योतिषियों के द्वारा डाउनलोड किया जाता है। हमारे शर्मा जी सुबह उठते ही टी0बी0 के सामने नतमस्तक होकर समाधि लगा लेते हैं और बारी-बारी से हर चैनल के ज्योतिषियों से अपनी राशि की पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट सुनते हैं। जब जनाब सारे विशेषज्ञों की राय सुन लेते हैं तब जाकर कहीं अपने पूरे दिन का चलना-फिरना, उठना-बैठना, खाना-पीना तय करते हैं।
एक दिन तो हद ही हो गई। एक ‘बोले तारे’ कार्यक्रम में किसी ने बोल दिया कि ‘आज विपरीत लिंग के लिए आपकी सहभागिता बढ़ सकती है’। अब शर्मा जी कन्फ्यूजन में पड़ गये कि श्रीमती जी तो उन दिनों मायके में विराजमान थीं। अब इनका यह भाग्यफल आखिर पूरा कैसे हो? अब भाग्यफल है तो उसे तो घटना ही है। यही सोच लिये जनाब छत पर कपड़े फैलाने निकले। यूं समझ लीजिए उन्होंने आस-पड़ोस की सभी छतों की स्कैनिंग कर डाली। कहीं कोई भाभी जी तो इनमें इन्ट्रेस्ट नहीं ले रही। खैर छतों पर भाभी जी टाइप की तो कोई चीज नहीं मिलीं अलबत्ता दो-चार धूप सेंकती चाचियाँ जरूर दिख गयीं। अब महोदय निराश होकर आफिस में ही इस भविष्यवाणी के सच होने की आशा बनाने लगे। फ्लशबैक में जाकर जनाब सोचने भी लगे कि अभी कल ही तो बगल की रीना जी ने उन्हें लन्च आफर किया था। आज हो सकता है कुछ और आफर कर दें। अब जनाब जोश से भरे हुए और होश से डरे हुए जैसे ही आफिस पहुंचे, पता चला आज बास और रीना जी किसी आफीशियल टूर पर गये हैं। अपने दिल के हजारों टुकड़ों को फेवीक्विक से जोड़ने के बाद वह समझ गये कि यह भाग्यफल इनका नहीं उनके बाॅस का था।
हमारे शर्मा जी इन ज्योतिषियों के बताये हुए समाधान पर भी गहरी आस्था रखते हैं। जनाब की दसों उंगलियां रंग-बिरंगे नगीनों की अंगूठियों से भरी रहती हैं। गले में दो-चार ताबीज हमेशा लटकते रहते हैं। कभी इस पेड़ के नीचे दिया जलाते हैं तो कभी उस पेड़ पर धागा बांधते हैं। समझ लीजिए कि महोदय हर दिन एक भूरी गाय को रोटी खिलाने का टारगेट पूरा करते हैं। इस चक्कर में दो-तीन किलोमीटर दूर टहलते हुए न जाने कितनी सफेद, काली और भूखी गायों को नजर अन्दाज करते हुए अपने लक्ष्य को पाकर ही मानते हैं। खैर मुझे आज तक समझ ही नहीं आया कि आपकी ग्रह नक्षत्र सुधारने में भूरी गाय को ही खाना खिल।ने की शर्त आखिर क्यों ? क्या सफेद या काली गाय की दुआ में कम ताकत होती है ?
-अलंकार रस्तोगी
एक दिन तो हद ही हो गई। एक ‘बोले तारे’ कार्यक्रम में किसी ने बोल दिया कि ‘आज विपरीत लिंग के लिए आपकी सहभागिता बढ़ सकती है’। अब शर्मा जी कन्फ्यूजन में पड़ गये कि श्रीमती जी तो उन दिनों मायके में विराजमान थीं। अब इनका यह भाग्यफल आखिर पूरा कैसे हो? अब भाग्यफल है तो उसे तो घटना ही है। यही सोच लिये जनाब छत पर कपड़े फैलाने निकले। यूं समझ लीजिए उन्होंने आस-पड़ोस की सभी छतों की स्कैनिंग कर डाली। कहीं कोई भाभी जी तो इनमें इन्ट्रेस्ट नहीं ले रही। खैर छतों पर भाभी जी टाइप की तो कोई चीज नहीं मिलीं अलबत्ता दो-चार धूप सेंकती चाचियाँ जरूर दिख गयीं। अब महोदय निराश होकर आफिस में ही इस भविष्यवाणी के सच होने की आशा बनाने लगे। फ्लशबैक में जाकर जनाब सोचने भी लगे कि अभी कल ही तो बगल की रीना जी ने उन्हें लन्च आफर किया था। आज हो सकता है कुछ और आफर कर दें। अब जनाब जोश से भरे हुए और होश से डरे हुए जैसे ही आफिस पहुंचे, पता चला आज बास और रीना जी किसी आफीशियल टूर पर गये हैं। अपने दिल के हजारों टुकड़ों को फेवीक्विक से जोड़ने के बाद वह समझ गये कि यह भाग्यफल इनका नहीं उनके बाॅस का था।
हमारे शर्मा जी इन ज्योतिषियों के बताये हुए समाधान पर भी गहरी आस्था रखते हैं। जनाब की दसों उंगलियां रंग-बिरंगे नगीनों की अंगूठियों से भरी रहती हैं। गले में दो-चार ताबीज हमेशा लटकते रहते हैं। कभी इस पेड़ के नीचे दिया जलाते हैं तो कभी उस पेड़ पर धागा बांधते हैं। समझ लीजिए कि महोदय हर दिन एक भूरी गाय को रोटी खिलाने का टारगेट पूरा करते हैं। इस चक्कर में दो-तीन किलोमीटर दूर टहलते हुए न जाने कितनी सफेद, काली और भूखी गायों को नजर अन्दाज करते हुए अपने लक्ष्य को पाकर ही मानते हैं। खैर मुझे आज तक समझ ही नहीं आया कि आपकी ग्रह नक्षत्र सुधारने में भूरी गाय को ही खाना खिल।ने की शर्त आखिर क्यों ? क्या सफेद या काली गाय की दुआ में कम ताकत होती है ?
-अलंकार रस्तोगी
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